नशा
गुटखा खैनी पान का, ऐसी चली रिवाज। खाते अंधाधुंध सब, दूषित हुआ समाज॥ फँसे नशे के जाल में, बच्चे और बुजुर्ग। झुग्गी जैसा तन बना, जो था पहले दुर्ग॥ मन से कुंठित हो गया, लगा नशे का रोग। हेय दृष्टि से देखते, उसको सारे लोग॥ नशा शान से जो करे, उसका होता नाश। ऐसे लोगों को सभी, कहते हैं अय्याश॥ जो जन करता है नशा, हो जाता बरबाद। निज कर्मों को छोड़कर, कैसे हो आबाद॥ मधु के मद में डूब कर, हुआ नशे में चूर। छूट गए रिश्ते सभी, हुआ सभी से दूर॥ माप प्रतिष्ठा का बना, जर्दा गुटखा पान। युवावर्ग गुमराह है, तनिक न उसको भान॥ नशेबाज कहते सभी, आती तनिक न लाज। बीवी-बच्चे हो रहे, रोटी को मोहताज॥ शराब एक ऐसी खतरनाक बुराई है जो बसे बसाए खुशहाल परिवार को भी उजाड़ देती है, तथा धन व बल दोनों का नाश करती है। 👉Must watch sadhna t.v 7:30pm सतभक्ति से शराब छूट सकती है। आज संत रामपाल जी से उपदेश लेकर बहुत लोग शराब छोड़ चुके हैं और उनके परिवार में खुशहाली आई है। Read book Gyan Ganga 📖 Jine ki raah📖 👇👇👇👇👇